Priests

All Pandits List India And other Country

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SHRI SHRI OM HARI JI MAHARAJ

FOUNDER OF PUJAWALA

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CO-FOUNDER PUJAWALA

Pandit Tanuj Kumar Vashistha

is an Indian spiritual leader and preacher from UTTAR PRADESH (INDIA) who is popularly known for his discourses on Ramcharitmanas across various cities in India and abroad. He is also known for philanthropy and social reforms through his discourses.

Pandit Suresh Bhardwaj

Expert Astrology

is an Indian spiritual leader and preacher from UTTAR PRADESH (INDIA) who is popularly known for his discourses on the Hawan, Shanti Vidhi, Shubh Vivah – Wedding Ceremony, Satyanarayan Katha, Griha pravesh , Namkaran Sanskar or Naming Ceremony, Nava Graha Shanti, Vangnischaya or Sakharpude or Engagement, Laxmi Puja, Thread Ceremony or Maunji Bandhan, Ganesh Puja, Annaprashan, Ramayan Paath, Mundan Sanskar, Bhagwat katha, Vastu Shanti, Sundarkand Puja etc. across various cities in India and abroad. He is also known for philanthropy and social reforms through his discourses.

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PANDIT SUMIT TIWARI

Neelesh BRHAMCHARI PUROHIT

PANDIT 

is an Indian spiritual leader and preacher from UTTAR PRADESH (INDIA) who is popularly known for his discourses on the Hawan, Shanti Vidhi, Shubh Vivah – Wedding Ceremony, Satyanarayan Katha, Griha pravesh , Namkaran Sanskar or Naming Ceremony, Nava Graha Shanti, Vangnischaya or Sakharpude or Engagement, Laxmi Puja, Thread Ceremony or Maunji Bandhan, Ganesh Puja, Annaprashan, Ramayan Paath, Mundan Sanskar, Bhagwat katha, Vastu Shanti, Sundarkand Puja etc. across various cities in India . He is also known for philanthropy and social reforms through his discourses.

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PANDIT 

is an Indian spiritual leader and preacher from UTTAR PRADESH (INDIA) who is popularly known for his discourses on the Hawan, Shanti Vidhi, Shubh Vivah – Wedding Ceremony, Satyanarayan Katha, Griha pravesh , Namkaran Sanskar or Naming Ceremony, Nava Graha Shanti, Vangnischaya or Sakharpude or Engagement, Laxmi Puja, Thread Ceremony or Maunji Bandhan, Ganesh Puja, Annaprashan, Ramayan Paath, Mundan Sanskar, Bhagwat katha, Vastu Shanti, Sundarkand Puja etc. across various cities in India . He is also known for philanthropy and social reforms through his discourses.

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पंडित रामशंकर शास्त्री!

 

श्रीमद्भागवत कथा के मूल प्रवक्ता पंडित रामशंकर शास्त्री (भैयाजी) मूल रूप से उत्तरप्रदेश के ग्राम भगवानपुर पोस्ट चिलुआ जिला कुशीनगर के निवासी है ये अपने पिता जी के तीसरी सन्तान है इनका घर का नाम संदीप कुमार मिश्र है सन 2004 में 17 मई को यर श्री अयोध्या जी के दर्शन को गए लेकिन वही के हो कर् रहा लिए श्री चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान रामकोट के पूज्य श्री बिन्दुगाद्यचार्य श्री महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य जी के सानिध्य में आपने 28मई 2004 में गुरुमंत्र प्राप्त कर् अध्ययन शुरू किया
फिर वही आपको रामशंकर दास की नाम भी मिला
आगे आप श्रीगुरुदेव जी के संग संमपूर्ण भारत की यात्रा की तथा कथा की शुरुआत भी की आपके जीवन मे पूज्य श्री गुरुदेब भगवान की अनन्त कृपा रही बचपन मे ही शास्त्री जी हनुमान चालीसा बजरंग बाण आदि कंठस्थ कर् लिए थे इनकेबाबा पूज्य श्री शोभाकांत जी हमेसा कहते थे बेटा जीवन मे भगवान की कथा जरूर करना इन्ही की बचन को पूर्ण करने के लिए आज भारत मे धर्म प्रचार हेतु निकले है

 

वैष्णवाचार्य श्री धर्मेन्द्र वत्स जी

भक्तोदय चैरीटेबल ट्रस्ट के संस्थापक वैष्णवाचार्य श्री धर्मेन्द्र वत्स जी, श्री हरि की भक्ति में अपने बाल्यकाल से ही रम गए थे। इनके दादाजी श्री बाबूराम वत्स जी ने कहानियों और पूजा आरतियो के माध्यम से गुरूजी को श्री कृष्ण जी से परिचित करवाया। गुरूजी उनको बेहद रूचि से सुना करते थे और उन सब कथाओ से बेहद प्रभावित भी हुए। छह वर्ष की ही आयु में, गुरुजी प्राचीन गुरु शिष्य प्रणाली पर आधारित वैदिक गुरुकुल से शिक्षा प्राप्ति हेतु चले गए थे । गुरुकुल में ही गुरूजी ने अपने विद्वान शिक्षकों से भारतीय सभ्यता एवं वेदो के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त किया।

गुरूजी की प्रारंभिक शिक्षा विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा स्थापित बद्री भगत वेद विद्यालय, नई दिल्ली में हुई। विदूषक आचार्यो वेदमूर्ति आचार्य श्री चंद्रभानु शर्मा जी एवं आचार्य श्री राम कुमार शर्मा जी के सानिध्य में रह कर गुरुजी ने सामवेद और शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनीय संहिता का गहन अध्यन किया। इसके अतिरिक्त, गुरु जी ने वर्ष २००७ में स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य वेद-वेदांग संस्कृत महाविद्यालय से रामानुज पूजा पद्धति और कर्मकांड आदि का अध्ययन किया। इस महाविद्यालय की स्थापना हरियाणा के महान विदूषक संत जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने फरीदाबाद में करवाई थी। इस महाविद्यालय में अध्ययन के उपरान्त, गुरु जी गायत्री उपासना में पूर्णतः पारंगत हो गए।

 

वर्ष २०११ में, गुरुजी ने वृंदावन के महान विदूषक भागवत रत्न संत श्री मुनिराज जी महाराज से श्रीमद भागवत कथा, ज्योतिष, व्याकरण और संगीत विद्या का गहन ज्ञान प्राप्त किया।

जगतगुरु निम्बार्काचार्य श्री राधासर्वेश्वरशरण देवाचार्य श्री श्री जी महाराज ने गुरु जी को राजस्थान स्तिथ किशनगढ़ निम्बार्क तीर्थ में शरण दी। उन्ही के आशीर्वाद से, गुरूजी वैष्णव समुदाय का हिस्सा बने। वैष्णव समुदाय के द्वारा प्रदित सभी नियमो के सही अनुपालन करने से, गुरूजी को समुदाय द्वारा सत्संग आयोजन और धर्म चर्चा करने की जिम्मेदारी सौपी गयी।

शीघ्र ही, इनकी धार्मिक प्रसिद्धि और अद्वितीय उपलब्धियों का संज्ञान ले कर, देशभर के संतो एवं आचार्यो ने गुरु श्री धर्मेन्द्र वत्स जी को वैष्णवाचार्य की उपाधि से सम्मानित किया। अपने गुरुओ के आशीर्वाद एवं संत समाज के सहयोग से, गुरूजी अभी तक सैकड़ो भागवत कथा पाठ और हजारो यज्ञ आयोजन संपन्न कर चुके है। अपने देश के कल्याण हेतु, धर्म के विस्तार हेतु, वेद ज्ञान प्रचार हेतु, गौ माता की सेवा हेतु और समाज कल्याण हेतु, गुरु जी ने अपना यह जीवन पूरी निष्ठा से समर्पित कर दिया है।

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